पंखों की परवाज़ परइतना भी अहंकार न करमृगतृष्णा सा जीवन तेरासहरा समझ के गुज़ारा कर।मं शर्मा (रज़ा)
पंखों की परवाज़ परइतना भी अहंकार न करमृगतृष्णा सा जीवन तेरासहरा समझ के गुज़ारा कर।
मं शर्मा (रज़ा)