Poetry 1 min read 619.7K reads

पड़ाव


थोड़ी सी धूप हैथोड़ी सी छाँव हैउम्र का ये पड़ावशायद लाजवाब है

थोड़ी सी नींद हैथोड़ी सी जाग हैस्वप्न देखने कीअब न कोई चाह है।

मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित

Read more Earn more Learn more