थोड़ी सी धूप हैथोड़ी सी छाँव हैउम्र का ये पड़ावशायद लाजवाब हैथोड़ी सी नींद हैथोड़ी सी जाग हैस्वप्न देखने कीअब न कोई चाह है।मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित
थोड़ी सी धूप हैथोड़ी सी छाँव हैउम्र का ये पड़ावशायद लाजवाब है
थोड़ी सी नींद हैथोड़ी सी जाग हैस्वप्न देखने कीअब न कोई चाह है।
मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित