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परन्तु


कभी जीत कर हारा सा लगाकभी हार कर संतोष हुआअजीब खेल इस दुनिया मेंसदियों से यूँही चलता रहा

मदारी कहे मैं पालूँ तुझकोभालू कहे मैं दोनों को पाल रहादोनों इसी गफलत में जीतेपरंतु मैं जानूँ तू चला रहा ।

मं शर्मा (रज़ा)

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