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पारदर्शी


अमृत सा पवित्र होमानो महकता इत्र होमन कृतज्ञ हो जिसकाऐसा एक मित्र हो

चित्र हो कि चरित्र होपारदर्शी कृतीत्व होएक श्रेष्ठ व्यक्तित्व होचाहे कितना विचित्र हो।

मं शर्मा (रज़ा)

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