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पपीहा


उसको लगता थापुकार सुन करएकदिन पियाआ जाएंगे

प्यास बुझानेउसके हिय कीस्वाति नक्षत्र बनछा जाएँगे

सदियां बीतींपिय पिय टेरतेबैरी है पियाअब तक न पलटे।

मं शर्मा (रज़ा)

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