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पाप पुण्य


धरती से आकाश तकपुण्य के प्रताप तकजीवन से मरण तकप्राणियों की पुकार तक

मन के चक्षु खोल करएक बार तू देख तोपाप_पुण्य के लोक मेंसर्वत्र उसका राज है ।

मं शर्मा (रज़ा)

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