धरती से आकाश तकपुण्य के प्रताप तकजीवन से मरण तकप्राणियों की पुकार तकमन के चक्षु खोल करएक बार तू देख तोपाप_पुण्य के लोक मेंसर्वत्र उसका राज है ।मं शर्मा (रज़ा)
धरती से आकाश तकपुण्य के प्रताप तकजीवन से मरण तकप्राणियों की पुकार तक
मन के चक्षु खोल करएक बार तू देख तोपाप_पुण्य के लोक मेंसर्वत्र उसका राज है ।
मं शर्मा (रज़ा)