पायल की छमक नेचूड़ियों की खनक नेघड़ों का बाजार सापनघट पे खोला हैतृष्णा से मुक्ति कोजीवन की तृप्ति कोपनघट ने दिल खोलजीवन में रस घोला है ।मं शर्मा (रज़ा)
पायल की छमक नेचूड़ियों की खनक नेघड़ों का बाजार सापनघट पे खोला है
तृष्णा से मुक्ति कोजीवन की तृप्ति कोपनघट ने दिल खोलजीवन में रस घोला है ।
मं शर्मा (रज़ा)