हर युग में फलते फूलतेये पावन पेड़ पलाश केरक्तवर्ण फूलों को धारेलगते हैं मानो दहकतेकड़ी धूप में तप तप करत्यौहारी बसंत बिखरतेमीठी मुस्कानें धर अधर परपलाश होकर धन्य समझते।मं शर्मा (रज़ा)
हर युग में फलते फूलतेये पावन पेड़ पलाश केरक्तवर्ण फूलों को धारेलगते हैं मानो दहकते
कड़ी धूप में तप तप करत्यौहारी बसंत बिखरतेमीठी मुस्कानें धर अधर परपलाश होकर धन्य समझते।
मं शर्मा (रज़ा)