ये दुनिया एक सुंदर बगीचादिन भर मैं इसमें विचरतामैं पक्षी हूँ उन्मुक्त गगन काउड़ता फिरता जब जी करतादोनों जहां में है आना जानाशुक्रगुजार हूँउसकी रहमत का।मं शर्मा( रज़ा)
ये दुनिया एक सुंदर बगीचादिन भर मैं इसमें विचरतामैं पक्षी हूँ उन्मुक्त गगन काउड़ता फिरता जब जी करतादोनों जहां में है आना जानाशुक्रगुजार हूँउसकी रहमत का।
मं शर्मा( रज़ा)