विश्वास की चादररफू नहीं होतीखुल जाए तुरपाईफिर वैसी नहीं रहतीरिश्तों पर अक्सरसवाल उठते हैंपाकीज़गी रिश्तों कीदिखाई नहीं देती ।मं शर्मा (रज़ा)
विश्वास की चादररफू नहीं होतीखुल जाए तुरपाईफिर वैसी नहीं रहती
रिश्तों पर अक्सरसवाल उठते हैंपाकीज़गी रिश्तों कीदिखाई नहीं देती ।
मं शर्मा (रज़ा)