Poetry 1 min read 624.5K reads

पगडंडी


सूने हो गए गाँव सभी जबशहर की सड़क से जा मिलीआज सूनी पड़ी है पगडंडीकितनी मसरूफ रहती थी

शहर की चकाचौंध शायदभोले से गाँव को भरमा गईनागिन सी काली चौड़ी सड़केंगाँव की पगडंडी निगल गईं।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more