हरी भरी वसुंधरा परचमचमाती हुई शबनममानो किसी नवयौवना केआँचल में टँके रजत कणकुछ पल है श्रंगार धरा काकुछ पल का यौवनमिटा देगी अस्तित्व ओस कासूरज की पहली किरण ।मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित
हरी भरी वसुंधरा परचमचमाती हुई शबनममानो किसी नवयौवना केआँचल में टँके रजत कण
कुछ पल है श्रंगार धरा काकुछ पल का यौवनमिटा देगी अस्तित्व ओस कासूरज की पहली किरण ।
मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित