Poetry 1 min read 617.6K reads

ओस


हरी भरी वसुंधरा परचमचमाती हुई शबनममानो किसी नवयौवना केआँचल में टँके रजत कण

कुछ पल है श्रंगार धरा काकुछ पल का यौवनमिटा देगी अस्तित्व ओस कासूरज की पहली किरण ।

मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित

Read more Earn more Learn more