निर्जन पथ साजीवन सफर होअंधकार चहुँओरनिशा का होपथ प्रकाशितकरने की खातिरखुद को दीपककर लेना तुम।मं शर्मा( रज़ा)
निर्जन पथ साजीवन सफर होअंधकार चहुँओरनिशा का हो
पथ प्रकाशितकरने की खातिरखुद को दीपककर लेना तुम।
मं शर्मा( रज़ा)