स्वयं से निराश हूँ

जाने क्यों हताश हूँ

आशाओं के अर्श पर

निराशाओं का गर्त हूँ


जीवन एक पहेली सी

दुश्मन की सहेली सी

रिश्तों की भूलभुलैंया में

ना अपना ना पराया हूँ


खोया हुआ विश्वास हूँ

लापता सी तलाश हूँ

किसी निरर्थक प्रश्न का

निराधार सा उत्तर हूँ ।


मं शर्मा (रज़ा)