जुगनुओं की फौज लेकररात्रि से लड़ने चला हूँहाथ में मशाल नहीं हैरोशनी करने चला हूँजिंदगी की जंग कोनिहत्थे ही लड़ने चला हूँखौफ किस बात का हैकफन बाँध कर निकला हूँ।मं शर्मा( रज़ा)
जुगनुओं की फौज लेकररात्रि से लड़ने चला हूँहाथ में मशाल नहीं हैरोशनी करने चला हूँ
जिंदगी की जंग कोनिहत्थे ही लड़ने चला हूँखौफ किस बात का हैकफन बाँध कर निकला हूँ।
मं शर्मा( रज़ा)