नेक दिलनेकियाँ लुटा रहा हैप्यासों कोजीवनामृत पिला रहा है।मं शर्मा (रज़ा)
नेक दिलनेकियाँ लुटा रहा हैप्यासों कोजीवनामृत पिला रहा है।
मं शर्मा (रज़ा)