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नज़रअंदाज


नज़रों से हटाते न थे जो कभीवक्त बदलते ही नज़रअंदाज़ कर गएशाख के पत्ते हों कि अजीज अपनेसबक जीने के दोनों सिखा गए।

मं शर्मा (रज़ा)

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