लक्ष्य पर रखना नजर

कदम डगमगाना नहीं

नजर रख रही है नज़र

चरित्र को डिगाना नहीं


होने वाली है सहर

हौसलों तुम टूटना नहीं

साफ आएगा सब नजर

अंधेरों से डर जाना नहीं।


मं शर्मा( रज़ा)