सब मिथ्या हैसब असत्य हैसब अस्थिर हैसब नश्वर हैसुख लौकिक हैसुख क्षणिक हैफिर पाने कीक्यूँ ललक हैकभी तो मन केभीतर झाँक लेअलौकिक आनंद कीअनुभूति कर ले ।मं शर्मा( रज़ा)
सब मिथ्या हैसब असत्य हैसब अस्थिर हैसब नश्वर है
सुख लौकिक हैसुख क्षणिक हैफिर पाने कीक्यूँ ललक है
कभी तो मन केभीतर झाँक लेअलौकिक आनंद कीअनुभूति कर ले ।
मं शर्मा( रज़ा)