Poetry 1 min read 615.9K reads

नश्वर


सब मिथ्या हैसब असत्य हैसब अस्थिर हैसब नश्वर है

सुख लौकिक हैसुख क्षणिक हैफिर पाने कीक्यूँ ललक है

कभी तो मन केभीतर झाँक लेअलौकिक आनंद कीअनुभूति कर ले ।

मं शर्मा( रज़ा)

Read more Earn more Learn more