नफासत तेरे श्रंगार में नहींखूबसूरती तेरे किरदार में हैमैं कायल नहीं तेरी पाजेब कामुझे इश्क इसकी झंकार से है ।मं शर्मा (रज़ा)
नफासत तेरे श्रंगार में नहींखूबसूरती तेरे किरदार में हैमैं कायल नहीं तेरी पाजेब कामुझे इश्क इसकी झंकार से है ।
मं शर्मा (रज़ा)