नाज़ुक दिल फिर तोड़ आयाआस बंधा कर छोड़ आयामिलन में बंदिशें बहुत थींआज फिर यकीं करा आया ।म शर्मा (रज़ा)
नाज़ुक दिल फिर तोड़ आयाआस बंधा कर छोड़ आयामिलन में बंदिशें बहुत थींआज फिर यकीं करा आया ।
म शर्मा (रज़ा)