तुम बिन जीवन द्वंद जैसाबिन कविता के छंद जैसाबिन मिठास मकरंद जैसापंछी कोई नजरबंद जैसा।मं शर्मा( रज़ा)
तुम बिन जीवन द्वंद जैसाबिन कविता के छंद जैसाबिन मिठास मकरंद जैसापंछी कोई नजरबंद जैसा।
मं शर्मा( रज़ा)