तू खिलाड़ी इस खेल काखिलाता कोई और हैनाचता फिरे रात दिननचाता कोई और हैमुगालता है पाले रखवास्तविकता कुछ और हैअनेकों में समाया हुआबस वो ही एक है ।मं शर्मा (रज़ा)
तू खिलाड़ी इस खेल काखिलाता कोई और हैनाचता फिरे रात दिननचाता कोई और है
मुगालता है पाले रखवास्तविकता कुछ और हैअनेकों में समाया हुआबस वो ही एक है ।
मं शर्मा (रज़ा)