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नाच नचैया


तू खिलाड़ी इस खेल काखिलाता कोई और हैनाचता फिरे रात दिननचाता कोई और है

मुगालता है पाले रखवास्तविकता कुछ और हैअनेकों में समाया हुआबस वो ही एक है ।

मं शर्मा (रज़ा)

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