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मूर्खराज


अपनी अपनी क्षमताएँअपना अपना प्रहार हैजिसकी जितनी तेज़ मतिउतनी तीक्ष्ण कटार है

डाल डाल पे बैठे उल्लूसब में कहाँ वो बात हैडालें काट सकते हैं सारेविरला मूर्ख ही कालिदास है।

मं शर्मा (रज़ा)

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