मूर्खों की मजलिस मेंसबका अभिनंदन हैजो जितना बड़ा हैउतना उसका वंदन हैअपनी अपनी योग्यता काहो रहा महिमामंडन हैआज के दिवस ने कियाइन्हीं को समर्पण है ।मं शर्मा( रज़ा)
मूर्खों की मजलिस मेंसबका अभिनंदन हैजो जितना बड़ा हैउतना उसका वंदन है
अपनी अपनी योग्यता काहो रहा महिमामंडन हैआज के दिवस ने कियाइन्हीं को समर्पण है ।
मं शर्मा( रज़ा)