तन्हाई के शोर से बचकेएकांत को जीने लगा हूँऐसी मुर्दनी छाई जीवन मेंविष को अमृत समझने लगा हूँ।मं शर्मा (रज़ा)
तन्हाई के शोर से बचकेएकांत को जीने लगा हूँऐसी मुर्दनी छाई जीवन मेंविष को अमृत समझने लगा हूँ।
मं शर्मा (रज़ा)