शब्दों के अर्थ वही हैंजीवन के संदर्भ वहीं हैंतुमको शायद मान्य नहीं हैबात ये भी सामान्य नहीं हैअसत्य की आवाज घनी हैसत्य के मुँह में जुबान नहीं हैसत्य कटु है मृदुल न होगाहर प्रयास विफल ही होगा।मं शर्मा( रज़ा)
शब्दों के अर्थ वही हैंजीवन के संदर्भ वहीं हैंतुमको शायद मान्य नहीं हैबात ये भी सामान्य नहीं है
असत्य की आवाज घनी हैसत्य के मुँह में जुबान नहीं हैसत्य कटु है मृदुल न होगाहर प्रयास विफल ही होगा।
मं शर्मा( रज़ा)