मोह एक पिंजरा हैजिसमें मन अटका हैमरते दम तकजो न खुल पाया हैमोह छलावा हैफिर भी मन भाया हैनए नए रूप धरजीवन भर छलाया है।मं शर्मा (रज़ा)
मोह एक पिंजरा है
जिसमें मन अटका है
मरते दम तक
जो न खुल पाया है
मोह छलावा है
फिर भी मन भाया है
नए नए रूप धर
जीवन भर छलाया है।
मं शर्मा (रज़ा)