क्या है जो मिट रहा हैमेरे भीतर घट रहा हैजीने को शेष बचा नहींफिर भी जीवन चल रहा हैकल भी एक सुबह थीआज फिर एक सुबह हैआगे की व्यथा रची नहीं हैवक्त खुद को दोहरा रहा है।मं शर्मा (रज़ा)
क्या है जो मिट रहा हैमेरे भीतर घट रहा हैजीने को शेष बचा नहींफिर भी जीवन चल रहा है
कल भी एक सुबह थीआज फिर एक सुबह हैआगे की व्यथा रची नहीं हैवक्त खुद को दोहरा रहा है।मं शर्मा (रज़ा)