Poetry 1 min read 619.5K reads

मेहमान


सूरज ने प्रकाशित कियाहर गली कूचे मकान कोहमही कुछ इस तरह जीएज्यों चार दिन के मेहमान हो

चार दिन बहुत लंबे पड़ेखोला भी नहीं सामान कोजीवन तक तो जीना पड़ेगाचाहे सूरज बन कि सामान हो।

मं शर्मा( रज़ा)

Read more Earn more Learn more