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मयूर


सावन के आते ही मयूरझूम झूम कर गाता हैसुंदर नीले पंख खोलकरअद्भुत नृत्य कर इतराता हैज्यों पड़ती नज़र पैरों परमन ही मन सकुचाता है।

मं शर्मा(रज़ा)

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