प्रेम की धुरी हो तुमस्नेह का भंडार होमातृत्व काआधार तुमशक्ति अपरम्पार होजीवन का पहला पाठममतामयी किरदार होअपनों पे आँच आए तोतुम ही उग्र अवतार हो।मं शर्मा (रज़ा)
प्रेम की धुरी हो तुमस्नेह का भंडार होमातृत्व काआधार तुमशक्ति अपरम्पार हो
जीवन का पहला पाठममतामयी किरदार होअपनों पे आँच आए तोतुम ही उग्र अवतार हो।
मं शर्मा (रज़ा)