मनुहार's image
Share0 Bookmarks 63245 Reads0 Likes

धानी चुनरिया ओढ़ के

धरती ने सिंगार किया है

अग्निबाण न छोड़े आज

सूरज से मनुहार किया है


सांझ ढले जब पंछी लौटें<

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts