पात सभी झड़ गएकदमों तले कुचल गएसमय के कुचक्र सेसभी पतझड़ हो गएदूर किसी दरख्त परकाल वश निर्वस्त्र परसूनी उजड़ी राह परदृग अपने गाड़ करएक सुवासित मंजरीसिकुड़ी सहमी बावरीबहार के पुनरागमन कीबाट जोहती रही।मंजू शर्मा (रज़ा)
पात सभी झड़ गएकदमों तले कुचल गएसमय के कुचक्र सेसभी पतझड़ हो गए
दूर किसी दरख्त परकाल वश निर्वस्त्र परसूनी उजड़ी राह परदृग अपने गाड़ कर
एक सुवासित मंजरीसिकुड़ी सहमी बावरीबहार के पुनरागमन कीबाट जोहती रही।
मंजू शर्मा (रज़ा)