Poetry 1 min read 617.6K reads

मनमर्जी


टूटने लगे सपनेतिरकने लगा विश्वाससमय की सिलवटों सेझाँकने लगी दरार

वक्त की मनमर्जियाँउड़ा गई धज्जियाँजिंदगी की दीवार कीउतर गई पपड़ियाँ।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more