टूटने लगे सपनेतिरकने लगा विश्वाससमय की सिलवटों सेझाँकने लगी दरारवक्त की मनमर्जियाँउड़ा गई धज्जियाँजिंदगी की दीवार कीउतर गई पपड़ियाँ।मं शर्मा (रज़ा)
टूटने लगे सपनेतिरकने लगा विश्वाससमय की सिलवटों सेझाँकने लगी दरार
वक्त की मनमर्जियाँउड़ा गई धज्जियाँजिंदगी की दीवार कीउतर गई पपड़ियाँ।
मं शर्मा (रज़ा)