रोटी कपड़ामकान दुकानधन दौलतमान अभिमानतब तक ही हैसबका स्थानजब तक हैतन में जानसब धरारह जाएगाछूटेंगे जबदेह से प्राण।मं शर्मा (रज़ा)
रोटी कपड़ामकान दुकानधन दौलतमान अभिमान
तब तक ही हैसबका स्थानजब तक हैतन में जान
सब धरारह जाएगाछूटेंगे जबदेह से प्राण।
मं शर्मा (रज़ा)