थोड़ा बिगाड़ थोड़ा सुधार करमन नये पुल बनाता है अक्सरकभी सुख की बगिया घुमाकरकभी गम के थपेड़े खिला करजीवन के यथार्थ को समझाकरवापिस यहीं छोड़ जाता है लाकर।मं शर्मा (रज़ा)
थोड़ा बिगाड़ थोड़ा सुधार करमन नये पुल बनाता है अक्सरकभी सुख की बगिया घुमाकरकभी गम के थपेड़े खिला करजीवन के यथार्थ को समझाकरवापिस यहीं छोड़ जाता है लाकर।
मं शर्मा (रज़ा)