उर की उमंग ने

मन मस्त मलंग ने

हिय के हुड़दंग ने

बना लिया है अपना मन


साथ कभी छूटे ना

साथी कभी रूठे ना

जीवन का ये छोर

हाथों से अब छूटे ना।


मं शर्मा( रज़ा)

#स्वरचित