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मलिन


इन दागदार धब्बों नेधरती संग दगा किया हैतुम अपने कर्मों सेइसको और न मलिन करो

सुंदर कोमल विचारों सेदुनिया को खुशहाल करोगुलाब हो खुशबू फैलाओकाँटों से खुद बचे रहो।

मं शर्मा (रज़ा)

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