Poetry 1 min read 81.1K reads

लुप्त


छिपा सत्यझूठ नहीं हैझूठ केपाँव नहीं हैं

जो समक्ष हैलुप्त नहीं हैप्रत्यक्ष काप्रमाण नहीं है।

मं शर्मा( रज़ा)

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