नज़र नज़र की लियाकत हैढूँढले हर शय में नफासत कोसुंदरता का अहसास उसे हैजिसकी नजर में नज़ाकत होसुंदरता का वजूद तभी तक हैजबतक नज़ाकत की हिफाज़त हो।मं शर्मा (रज़ा)
नज़र नज़र की लियाकत हैढूँढले हर शय में नफासत कोसुंदरता का अहसास उसे हैजिसकी नजर में नज़ाकत होसुंदरता का वजूद तभी तक हैजबतक नज़ाकत की हिफाज़त हो।
मं शर्मा (रज़ा)