रूह का क्या हैयूँ भी रह लेगीजिस्म को एकलिबास की गरज़ है ।मं शर्मा (रज़ा)
रूह का क्या हैयूँ भी रह लेगीजिस्म को एकलिबास की गरज़ है ।
मं शर्मा (रज़ा)