मन मेराख्याल तुम्हारे क्यों हैंघर मेरानिशान तुम्हारे क्यों हैंज़ख्म मेरेअहसान तुम्हारे क्यों हैंमर्ज़ी मेरीफरमान तुम्हारे क्यों हैं।मं शर्मा( रज़ा)
मन मेराख्याल तुम्हारे क्यों हैंघर मेरानिशान तुम्हारे क्यों हैं
ज़ख्म मेरेअहसान तुम्हारे क्यों हैंमर्ज़ी मेरीफरमान तुम्हारे क्यों हैं।
मं शर्मा( रज़ा)