Poetry 1 min read 482K reads

क्यों हैं


मन मेराख्याल तुम्हारे क्यों हैंघर मेरानिशान तुम्हारे क्यों हैं

ज़ख्म मेरेअहसान तुम्हारे क्यों हैंमर्ज़ी मेरीफरमान तुम्हारे क्यों हैं।

मं शर्मा( रज़ा)

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