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कुसुम


आज हवा में खुशबू कीफिर हलकी महक सी हैसुना है बागों में फूलों कीॠतु जल्दी आने को है

हम भी बैठे हैं राहों मेंपतझड़ के वसन झाड़ करदेखना है बहार का रूखअब की बार किधर को है।

मं शर्मा (रज़ा)

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