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कुलधर्म


मर्यादा थी मैं तो कुल कीस्वाभिमान था मेरा धर्मअपमानित हो गई कुलवधूकुल ने होने दिया कुकर्म

धरे रह गए संस्कार सारेहोता रहा स्त्री का अपमानक्या कोई प्रतिकार कोई दंडलौटा सकेगा खोया सम्मान।

मं शर्मा (रज़ा)

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