पास बैठा याधत्ता बताक्या मेरी खताकुछ तो बताऐ जिन्दग़ीमैं बुझा बुझातू खफा खफाकिस बात की सजाकुछ तो बताऐ जिन्दग़ीमं शर्मा (रज़ा)
पास बैठा याधत्ता बताक्या मेरी खताकुछ तो बताऐ जिन्दग़ी
मैं बुझा बुझातू खफा खफाकिस बात की सजाकुछ तो बताऐ जिन्दग़ी
मं शर्मा (रज़ा)