पास बैठा या
धत्ता बता
क्या मेरी खता
कुछ तो बता
ऐ जिन्दग़ी
मैं बुझा बुझा
तू खफा खफा
किस बात की सजा
कुछ तो बता
ऐ जिन्दग़ी
मं शर्मा (रज़ा)


पास बैठा या
धत्ता बता
क्या मेरी खता
कुछ तो बता
ऐ जिन्दग़ी
मैं बुझा बुझा
तू खफा खफा
किस बात की सजा
कुछ तो बता
ऐ जिन्दग़ी
मं शर्मा (रज़ा)