तनहाई के सफर का कोई

हमसफर नहीं है राहों में

संभाल कर रखले मुझे तू

एहतियातन यादगारों में


गुज़रे हुए कुछ पल कभी

लौटते नहीं है॔ ख्वाबों में

संभाल कर रखले मुझे तू

एहतियातन यादगारों में ।



मं शर्मा (रज़ा)