Poetry 1 min read 623.1K reads

कुछ ख्वाब


भूख से पहचान पुरानी हैरोटी से कम ही मिलना होता हैतीन दिन पुरानी भूख ने अभीचार दिन पुरानी रोटी खाई है

अब मैं फिर कई दिनों तकभूख को छका सकता हूँबचपन के कुछ ख्वाबों कोजीवन भर झुठला सकता हूँ।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more