तुझी से अदावततुझी से मुहब्बततेरे संग ही जीना हैअब तू ठुकराएया अपना बनालेतेरे चरणों में रहना हैसुख भी कुबूल तेरेदुख भी कुबूल हैंअब किसीसे न डरना है।मं शर्मा रज़ा)
तुझी से अदावततुझी से मुहब्बततेरे संग ही जीना है
अब तू ठुकराएया अपना बनालेतेरे चरणों में रहना है
सुख भी कुबूल तेरेदुख भी कुबूल हैंअब किसीसे न डरना है।
मं शर्मा रज़ा)