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क्षीण


क्षीण पड़ने लगे रंगटंगे टंगे तस्वीरों केबदरंग हुई दीवारों पेयादों की धूल के

आईना हैं तस्वीरेंगुजरे लम्हात कासंग गुजारे पलों केबिछड़े हुए साथ का ।

मं शर्मा( रज़ा)

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